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इतिहास
झारखंड मुक्ति मोर्चा, जो जन सामान्य के बीच जेएमएम नाम से प्रसिद्ध है, एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है. इसका प्रभुत्व झारखंड और इसके समीपवर्ती राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में है। श्री शिबू सोरेन इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वर्तमान में झारखंड मुक्ति मोर्चा की झारखंड में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ साझा सरकार है। श्री हेमंत सोरेन इस सरकार के मुख्यमंत्री हैं।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की अवस्थापना के मूल में झारखंड मुक्ति का आंदोलन सन्निहित है। इस पार्टी की मूल विचारधारा क्षेत्रीय और संपूर्ण विकास है। इसकी स्थापना 19वीं सदी के हिन्दू स्वावलंबी और ब्रिटिश हुकूमत से जन-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़नेवाले भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर साल 1973 में हुई। बिरसा मुंडा के बाद 80 के दशक में झारखंड आंदोलन ने मोर्चा की अगुवाई में फिर गति पकड़ी और इसका पहला प्रतिध्वनन संसदीय चुनावों में सुनाई दिया। सत्ता के गलियारों में निर्बाध रूप से झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अलग प्रदेश की आवाज बुलंद की। तत्पश्चात, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने झारखंड मामलों के लिए एक समिति का गठन किया। इस समिति की अनुशंसाओं के आलोक में ही केन्द्र सरकार और बिहार सरकार ने वर्ष 1995 में श्री शिबू सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड क्षेत्रीय स्वायत्तशासी परिषद की स्थापना की। केन्द्र और राज्य सरकार की तरफ से झारखंड मुक्ति के लिए यह एक पहला और महत्वपूर्ण बड़ा कदम साबित हुआ। श्री शिबू सोरेन के नेतृत्व वाले इस परिषद ने झारखंड पृथक्करण की सरकारी नींव डाली।

22 जुलाई, 1997 को श्री शिबू सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा के आंदोलन के दबाव में ही बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने बिहार विधान सभा से झारखंड बंटवारे का एक प्रस्ताव पारित कराया। लालू उस समय अल्पमत सरकार का नेतृत्व कर रहे थे जिसे झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपना सशर्त समर्थन दिया था। यद्दपि, वर्ष 1998 में लालू प्रसाद अपने वादे से मुकर गए। इससे खफा मोर्चा ने उनकी सरकार को समर्थन देने से इनकार कर दिया।

बाद में वर्ष 2000 में बिहार विधान सभा ने झारखंड राज्य के निर्माण के लिए बिहार पुनर्गठन विधेयक-2000 पारित किया जिसे बाद में संसद ने भी पारित कर दिया। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद 15 नवंबर 2000 को भारत के मानचित्र पर 28वें राज्य के रूप में झारखंड का आविर्भाव हुआ।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के अहम पड़ाव

वर्ष 1969 में श्री शिबू सोरेन ने सोनत सांथाली समाज की स्थापना की। इसके बाद 04 फरवरी 1973 को श्री शिबू सोरेन ने शिवाजी समाज के विनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। विनोद बिहारी महतो मोर्चा के अध्यक्ष बनाए गए और शिबू सोरेन महासचिव ।
विस्थापितों के पुनर्वास एवं कल-कराखानों में स्थानीय लोगों की बहाली के लिए संघर्ष तथा वन कानून और जंगल कटाई के विरोध में संघर्ष।
अलग राज्य झारखंड की अवस्थापना के पीछे शिबू सोरेन ने सतत श्रृंखलाबद्ध आंदोलन किए। इसके उपरांत अग्रांकित अहम मोड़ आए-
  • वर्ष 1987 में झारखंड समन्वय समिति का गठन हुआ।
  • दिसम्बर 1987 में झारखंड समन्वय समिति द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को एक ज्ञापन दिया गया जिसमें बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा एवं मध्य प्रदेश के 21 जिलों को मिलाकर अलग झारखंड राज्य बनाने की मांग की गई।
  • वर्ष 1991 में मोर्चा के तत्कालीन अध्यक्ष विनोद बिहारी महतो की मृत्यु के बाद श्री शिबू सोरेन इसके अध्यक्ष बनाए गए।
  • श्री शिबू सोरेन की अध्यक्षता में ही 7 अगस्त 1995 को झारखंड क्षेत्रीय स्वायत्त परिषद (जैक) के गठन की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित हुई।
  • 22 जुलाई 1997 को बिहार विधानसभा ने अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए एक प्रस्ताव पारित किया।
  • अंतत: 15 नवंबर 2000 को झारखंड ने भारत के नक्शे पर 28वें राज्य के रुप में जन्म पाया।