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लक्ष्य
पृथक झारखंड के लिए करीब पांच दशक के संघर्ष के बाद अंतत: 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का निर्माण सफलीभूत हुआ किन्तु समृद्ध और खुशहाल झारखंड का सपना अभी भी अधूरा है। इस दिशा में बहुत सतत, ठोस कार्य करने और जनकल्याण की दिशा में मीलों का सफर तय करना अभी बाकी है, इस विश्वास के साथ कि हमें पहचान, सम्मान और अधिकार की प्राप्ति होगी।

हालांकि, अभी तक झारखंड सौतेलेपन का शिकार रहा है यह जगजाहिर होते हुए भी कि यहां की अधिकांश आबादी अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति की है। झारखंड मुक्ति मोर्चा का यह लक्ष्य है कि समाज के ऐसे पिछड़े वर्ग को विकास की मुख्यधारा में लाकर खड़ा किया जाय।

3. झारखंड खनिज संपदा के लिए दुनियाभर में मशहूर है। एक शतक से भी ज्यादा समय से इसकी भूमि के गर्भ में छुपे अनेक खनिज पदार्थों जैसे, कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, जिंक, तांबा, यूरेनियम, अभ्रक, गोलामाइट, चूना पत्थर, ग्रेनाइट का उत्खनन होता आ रहा है लेकिन कभी भी प्रदेश को भू-राजस्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल सका। कुल मिलाकर कहें तो यहां के संसाधनों का दोहन होता रहा है। उदाहरण के तौर पर झारखंड को कोयला उत्खनन के एवज में सिर्फ 1500 करोड़ रुपये बतौर सालाना भू राजस्व प्राप्य होता है। यह न केवल भू-राजस्व का असमान वितरण है बल्कि राजस्व के त्रुटिपूर्ण आंकलन और वितरण की एक साजिश भी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा संसद में अनवरत इसके खिलाफ आवाज बुलंद करता रहा है।

उत्खनन के कारण झारखंड में प्रदूषण, वनोन्मूलन और विस्थापन की समस्या गंभीर और विकराल रूप ले चुकी हैं। दशकों से कई पीढ़ियां असाध्य बीमारियों की चपेट में आकर अंधी-लंगड़ी पैदा हो रही हैं। यह राज्य शासन के लिए न केवल चिंता का विषय है अपितु एक बड़ी चुनौती भी है।

झारखंड गठन के 13 वर्षों बाद भी प्रदेशवासी एक स्थायी सरकार की ओर नजर लगाए हुए हैं, एक ऐसी सरकार जो यहां के जन साधारण को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराए, युवकों और बेरोजगारों को नौकरी के अवसर मुहैया कराए। यह सरकार किसानों और छोटे व्यापारियों को कल्याणकारी योजनाओं से राहत पहुंचाए। राज्य में आधारभूत संरचनाओं का विकास करे। वनों के लिए मशहूर झारखंड की प्राकृतिक वनस्पति संपदा का संरक्षण और संवर्द्धन करे, साथ ही वन्य जीवों का भी संरक्षण करे।

झारखंड में पर्यटन से अच्छे राजस्व प्राप्ति की संभावना है, अतएव इसके निमित्त दूरदर्शी सोचवाली कार्यनीति और संरचना का निर्माण करे।
राज्य उग्रवाद, नक्सली गतिविधियों और हिंसा से प्रभावित रहा है। इस दिशा में ठोस और कारगर समाधान की भी जरूरत है।