JMM Helpline: 1800 200 9621

शिबू सोरेन, अध्यक्ष, झारखंड मुक्ति मोर्चा
वर्षों से झारखंड के शोषित उत्पीड़ित आदिवासियों के एक मात्र निर्विवाद नेता श्री शिबू सोरेन हैं। उनके अनुयायी उन्हें सस्नेह गुरु जी कहकर पुकारते हैं। शिबू सोरेन एक तीव्र और जुझारू नेता हैं जो वर्तमान में दुमका से लोकसभा सांसद हैं और झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष भी। वर्ष 1969 में श्री शिबू सोरेन ने सोनत सांथाली समाज की स्थापना की। इसके बाद 04 फरवरी 1973 को श्री शिबू सोरेन ने शिवाजी समाज के विनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की थी।

5. शिबू सोरेन को झारखंड का तीसरा मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल है। वो तीन बार इस राज्य की कमान संभाल चुके हैं। राज्य की राजनीति से बाहर केन्द्र की राजनीति में भी उनका अहम योगदान रहा है। श्री सिबू सोरेन केन्द्र की मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री रह चुके हैं।

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी, सन् 1944 में अविभाजित बिहार के हजारीबाग जिले के नेमरा गाँव में हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा यहीं हुई। स्कूल की पढ़ाई पूरी करते ही शिबू सोरेन का विवाह हो गया। इसके बाद वे खेती के काम में अपने पिता की मदद करने लगे। श्रीमती रूपी सोरेन उनकी पत्नी हैं। इस दंपत्ति से तीन पुत्र- दुर्गा, हेमंत और बसंत और एक पुत्री अंजलि है। दुर्गा सोरेन की मृत्यु हो चुकी है जबकि हेमंत सोरेन फिलहाल झारखंड के मुख्यमंत्री हैं।

शिबू सोरेन के राजनीतिक जीवन की शुरुआत सन् 1970 से हुई। इससे कुछ दिन पहले उन्होंने सोनत सांथाल समाज की स्थापना की थी। 23 जनवरी, 1975 को जामताड़ा में आदिवासियों का नेतृत्व करते हुए इन्होंने स्थानीय लोगों की लड़ाई लड़ी थी। .श्री सोरेन पहली बार 1977 में लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे लेकिन पहली बार जीत हासिल नहीं हुई। वो हार को भुलाकर जनसेवा में जुट गए, अथक परिश्रम और गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने लगे।

इसके बाद सन् 1980 में उन्हें पहली बार संसद में जाने का मौका मिला। सन् 1989, 1991 और सन् 1996 में वो लगातार चुनाव जीते। 2002 में वे भाजपा के सहयोग से राज्यसभा के लिये चुने गये लेकिन सन् 2002 में ही दुमका लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में सांसद चुने गए। लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया।

2004 में हुए आम चुनावों में उन्होंने दुमका सीट से फिर चुनाव लड़ने का फैसला किया और वो लोकसभा के लिये चुने गये। इस जीत के बाद मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में वो केंद्रीय कोयला मंत्री बनाए गए। सन् 2005 में झारखंड विधानसभा चुनाव हुए जिसके बाद श्री सोरेन सूबे के मुख्यमंत्री बने लेकिन बहुमत के अभाव में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। मौजूदा वक्त में शिबू सोरेन झारखंड की दुमका सीट से सांसद हैं और वो राज्य के विकास के लिए आज भी लगातार संघर्ष कर रहे हैं।