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उद्देश्य
झारखंड 14 साल का हो चला है लेकिन अभी भी यहां विकास कोसों दूर है। राज्य ऊर्जा, सड़क, आधारभूत संरचना का विकास और रोजगार इत्यादि जैसी मूलभूत और बुनियादी जरूरतों से अभी भी वंचित है।

श्री शिबू सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड मुक्ति मोर्चा राज्यवासियों के कल्याणार्थ योजना बनाने और उसे मूर्त रूप देने के लिए सदैव तत्पर है।

जेएमएम इस वनाच्छादित राज्य को एक कल्याणकारी राज्य के रूप में परिणत करने की इच्छा और लक्ष्य रखता है, जहां प्रत्येक नागरिक को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जीवनयापन, पेयजल, स्वच्छता, आवास-प्रवास, कृषि-वानिकी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हो।

इस परिप्रेक्ष्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा के अग्रांकित उद्देश्यपूर्ण लक्ष्य हैं:
  • 1. कृषि को उद्योग का दर्जा प्रदान कर एवं कृषि श्रमिकों को पंजीकृत कर औद्योगिक श्रमिकों के समान वेतन एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना।
  • 2. राज्यभर में पंचायत स्तर पर कृषि विपणन की व्यवस्था करना ताकि किसान वहां अपने कृषि उपज बेच सकें और अपनी जरूरतों का सामान यथा, खाद-बीज, कीटनाशक, कृषि उपकरण की खरीदारी कर सकें।
  • 3. राज्य के किसानों को सुविधा हेतु उनके खेतों तक नि:शुल्क विद्युतीकरण एवं उन्हें 50 फीसदी अनुदान पर बिजली उपलब्ध कराना।
  • 4. राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करना एवं ग्राम पंचायत को आधारभूत संरचना के निर्माण एवं उसके रख-रखाव से जोड़ना।
  • 5. आधारभूत संरचना का तीव्र विकास मोर्चा का उद्देश्य है। बिना इसके राज्य में तीव्रतर विकास नहीं हो सकता है, इसलिए जेएमएम राज्य में गांव से लेकर शहर तक बड़े पैमाने पर सड़कों-पुलों, फ्लाइओवर, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना का संकल्प रखती है।
  • 6. सशक्तिकरण और कल्याण मोर्चा की प्राथमिकताओं में ऊपर है। जेएमएम राज्य में महिला अत्याचार के खिलाफ संवेदनशील है और शून्य महिला हिंसा का मानक स्थापित करने का उद्देश्य निर्धारित करता है। महिलाओं के अलावा बाल कल्याण भी मोर्चा का एक बड़ा संकल्प है।
  • 7. बालबाड़ी जैसी योजनाओं के सतत और सफल क्रियान्वयन से दूर की जा सकती है। इसके लिए हमें पोषक और पूरक भोज्य पदार्थों के साथ-साथ बच्चों और कुपोषित लोगों के बीच जिंक, आयरन और फोलिक एसिड की नियमित खुराक की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। इस दिशा में गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • 8. राज्य की एक चौथाई आबादी दैनिक पारिश्रमिक से जीवनयापन करती है। वर्ष के 8 महीने कृषि मजदूर इससे भी वंचित हो जाते हैं जो पलायन का कारण बनती है। इस दिशा में ठोस कार्यनीति बनाने और उसे साकार करने की जरूरत है।
  • 9. झारखंड की पहचान उसके प्राकृतिक एवं जैव संसाधनों से है किन्तु पर्यावरण ह्रास यहां के लिए बड़ी चिंता बनकर उभरी है। शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और उत्खनन की वजह से झारखंड की जैव विविधता बिगड़ रही है। सतत और टिकाऊ विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की भी सख्त जरूरत है।
  • 10. क्षेत्रीय भाषायी विविधता और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण-संवर्धन की दिशा में संवेदनशील और कल्याणकारी कार्यनीति बनाने और उसे धरातल पर उतारने की ठोस आवश्यकता है।